Friday, August 30, 2019

जीवन को कैसे जीयें ?

माइकल जैक्सन 150 साल जीना चाहता था!
किसी सेे साथ हाथ मिलाने से पहले दस्ताने
पहनता था!
लोगों के बीच में जाने से पहले मुंह पर मास्क
लगाता था !
अपनी देखरेख करने के लिए उसने
अपने घर पर 12 डॉक्टर्स नियुक्त किए हुए थे !
जो उसके सर के बाल से लेकर पांव के नाखून तक की
जांच प्रतिदिन किया करते थे!
उसका खाना लैबोरेट्री में चेक होने के बाद उसे
खिलाया जाता था!
स्वयं को व्यायाम करवाने के लिए उसने
15 लोगों को रखा हुआ था!
माइकल जैकसन अश्वेत था,
उसने 1987 में प्लास्टिक सर्जरी करवाकर
अपनी त्वचा को गोरा बनवा लिया था!
अपने काले मां-बाप और काले दोस्तों को भी
छोड़ दिया
गोरा होने के बाद उसने गोरे मां-बाप को
किराए पर लिया! और
अपने दोस्त भी गोरे बनाए
शादी भी गोरी औरतों के साथ की!
नवम्बर 15 को माइकल ने अपनी नर्स डेबी रो
से विवाह किया,
जिसने प्रिंस माइकल जैक्सन जूनियर (1997)
तथा
पेरिस माइकल केथरीन (3 अपैल 1998) को
जन्म दिया।
वो डेढ़ सौ साल तक जीने के लक्ष्य को लेकर
चल रहा था!
हमेशा ऑक्सीजन वाले बेड पर सोता था
उसने अपने लिए अंगदान करने वाले
डोनर भी तैयार कर रखे थे!
जिन्हें वह खर्चा देता था,
ताकि समय आने पर उसे किडनी, फेफड़े, आंखें
या किसी भी शरीर के अन्य अंग की जरूरत
पड़ने पर वह आकर दे दें,
उसको लगता था वह पैसे और अपने रसूख की
बदौलत मौत को भी चकमा दे सकता है,
लेकिन वह गलत साबित हुआ
25 जून 2009 को उसके दिल की धड़कन
रुकने लगी,
उसके घर पर 12 डॉक्टर की मौजूदगी में
हालत काबू में नहीं आए,
सारे शहर के डाक्टर उसके घर पर जमा हो गए
वह भी उसे नहीं बचा पाए।

उसने 25 साल तक डॉक्टर की सलाह के
विपरीत, कुछ नहीं खाया!
अंत समय में उसकी हालत बहुत खराब हो गई थी
50 साल तक आते-आते वह पतन के करीब ही पहुंच गया था
और 25 जून 2009 को
वह इस दुनिया से चला गया !
जिसने अपने लिए डेढ़ सौ साल जीने का
इंतजाम कर रखा था!
उसका इंतजाम धरा का धरा रह गया!
जब उसकी बॉडी का पोस्टमार्टम हुआ तो
डॉक्टर ने बताया कि,
उसका शरीर हड्डियों का ढांचा बन चुका था!
उसका सिर गंजा था,
उसकी पसलियां कंधे हड्डियां टूट चुके थे,
उसके शरीर पर अनगिनत सुई के निशान थे,
प्लास्टिक सर्जरी के कारण होने वाले दर्द से
छुटकारा पाने के लिए एंटीबायोटिक वाले
दर्जनों इंजेक्शन उसे दिन में लेने पड़ते थे!

माइकल जैक्सन की अंतिम यात्रा को
2.5 अरब लोगो ने लाइव देखा था।
यह अब तक की सबसे ज़्यादा
देखे जाने वाली लाइव ब्रॉडकास्ट हैं।

माइकल जैक्सन की मृत्यु के दिन यानी
25 जून 2009 को 3:15 PM पर,
Wikipedia,Twitter और AOL’s
instant messenger
यह सभी क्रैश हो गए थे।
उसकी मौत की खबर का पता चलता ही
गूगल पर 8 लाख लोगों ने
माइकल जैकसन को सर्च किया!
ज्यादा सर्च होने के कारण गूगल पर
सबसे बड़ा ट्रैफिक जाम हुआ था! और
गूगल क्रैश हो गया,
ढाई घंटे तक गूगल काम नहीं कर पाया!
मौत को चकमा देने की सोचने वाले
हमेशा मौत से चकमा खा ही जाते हैं!

सार यही है,
बनावटी दुनिया के बनावटी लोग
कुदरती मौत की बजाय
बनावटी मौत ही मरते हैं!

"क्यों करते हो गुरुर अपने चार दिन के ठाठ पर ,
मुठ्ठी भी खाली रहेंगी जब पहुँचोगे घाट पर"...

कुछ गंभीर प्रश्न--
चिन्तन अवश्य कीजियेगा.......

क्या हम बिल्डर्स, इंटीरियर डिजाइनर्स,
केटरर्स और डेकोरेटर्स के लिए कमा रहे हैं ?

हम बड़े-बड़े क़ीमती मकानों और
बेहद खर्चीली शादियों से
किसे इम्प्रेस करना चाहते हैं ?

क्या आपको याद है कि,
दो दिन पहले किसी की शादी पर आपने
क्या खाया था ?

जीवन के प्रारंभिक वर्षों में,
क्यों हम पशुओं की तरह काम में जुते रहते हैं ?

कितनी पीढ़ियों के,खान पान और
लालन पालन की व्यवस्था करनी है हमें ?

हम में से अधिकाँश लोगों के दो बच्चे हैं। बहुतों का तो सिर्फ एक ही बच्चा है।

        "हमारी जरूरत कितनी हैं ?और
          हम पाना कितना चाहते हैं"?

इस बारे में सोचिए।

क्या हमारी अगली पीढ़ी
कमाने में सक्षम नहीं है जो,
हम उनके लिए ज्यादा से ज्यादा
सेविंग कर देना चाहते हैं ?

क्या हम सप्ताह में डेढ़ दिन अपने मित्रों,
अपने परिवार और अपने लिए
स्पेयर नहीं कर सकते ?

क्या आप अपनी मासिक आय का
5% अपने आनंद के लिए,
अपनी ख़ुशी के लिए खर्च करते हैं ?

             सामान्यतः जवाब नहीं में ही होता है

हम कमाने के साथ साथ
आनंद भी क्यों नहीं प्राप्त कर सकते ?

इससे पहले कि आप
स्लिप डिस्क्स का शिकार हो जाएँ,
इससे पहले कि,
कोलोस्ट्रोल आपके हार्ट को ब्लॉक कर दे,
आनंद प्राप्ति के लिए समय निकालिए !!

हम किसी प्रॉपर्टी के मालिक नहीं होते,
सिर्फ कुछ कागजातों, कुछ दस्तावेजों पर
अस्थाई रूप से हमारा नाम लिखा होता है।

ईश्वर भी व्यंग्यात्मक रूप से हँसेगा
जब कोई उसे कहेगा कि,

"मैं जमीन के इस टुकड़े का मालिक हूँ "

किसी के बारे में,
उसके शानदार कपड़े और
बढ़िया कार देखकर,
राय कायम मत कीजिए।

हमारे महान गणित और विज्ञान के शिक्षक
स्कूटर पर ही आया जाया करते थे !!*

धनवान होना गलत नहीं है ,
बल्कि.......
"सिर्फ धनवान होना गलत है"

आइए ज़िंदगी को पकड़ें,
इससे पहले कि,
जिंदगी हमें पकड़ ले...

एक दिन हम सब जुदा हो जाएँगे,
तब अपनी बातें,
अपने सपने हम बहुत मिस करेंगे।

दिन, महीने, साल गुजर जाएँगे,
शायद कभी कोई संपर्क भी नहीं रहेगा।
एक रोज हमारी बहुत पुरानी तस्वीर देखकर 
हमारे बच्चे हमी से पूछेंगे कि,
"तस्वीर में ये दुसरे लोग कौन हैं" ?

तब हम मुस्कुराकर
अपने अदृश्य आँसुओं के साथ
बड़े फख्र से कहेंगे---

"ये वो लोग हैं, जिनके साथ मैंने
अपने जीवन के बेहतरीन दिन गुजारे हैं। "

  इस मैसेज को
  अपने उन सभी मित्रों को पोस्ट कीजिए,
  जिन्हें आप कभी भूल नहीं पाएँगे।

  उन्हें पोस्ट कीजिए,
  जो कभी भी आपकी मुस्कान की वजह बने थे।

                
                    जिओ जिंदगी दोस्तों 👍💐

नई मैडम

आज सुबह-सुबह ही हेड साहब के पास बी आर सी से फोन आया, कि स्कूल में नयी नियुक्ति के बाद एक मैडम ज्वाइन करने आ रही हैं। हेड साहब प्रसन्न थे कि अब स्कूल में पर्याप्त अध्यापक हो गए और अब पढ़ाई में कोई व्यवधान नहीं होगा ।
राजेंद्र मास्टर का स्कूल जिला के श्रेष्ठ स्कूल में से एक है।भौतिक परिवेश इतना बेमिसाल कि देखने वाला आश्चर्यचकित रहा जाता था ।विशाल कैंपस में बड़े बड़े छायादार वृक्ष ,किनारे से बनी सुन्दर क्यारियों में लगे खूबसूरत फूल सबका मन मोह लेते थे।साफ सफाई भी इतनी कि आपका मन खुश् हो जाये ।सभी कक्षाएं व्यवस्थित रहती थी।कक्षाओं में वाॅल पेंटिंग और पोस्टर की भरमार,बच्चे साफ सुथरे और टाई बेल्ट से सुसज्जित।राजेन्द्र जी पिछले 15 साल से इसी विद्यालय में थे।अपनी कर्मठता से उन्होंने इस सरकारी विद्यालय को प्राथमिक से मध्य विद्यालय में उत्क्रमित करवाया और नामी कान्वेंट के बराबर पंहुचा दिया था।विद्यालय में 350 से अधिक छात्र थे पर क्या मजाल कि कोई बाहर दिखाई पड़े।
विद्यालय के स्टाफ में हेड राजेन्द्र जी के अलावा 4 लोग और थे जिसमे 3 महिलाएं थी ।सभी आपस में बहुत घुले-मिले थे और विद्यालय परिवार की कोई शिकायत कभी बाहर नहीं गयी थी।अध्यापक समय के पाबंद थे और मेहनत से अपना कार्य करते थे। ग्रामीणों का भरपूर सहयोग था।
आज नयी अध्यापिका का इंतज़ार पूरे विद्यालय को था।करीब 10 बजे विद्यालय गेट पर एक लक्ज़री कार आकर रुकी।कार से एक लगभग 30 वर्षीय सुन्दर महिला के साथ संकुल समन्वयक और एक बीआरपी भी उतरे। अपने अधिकारियों को देखकर विद्यालय के सभी अध्यापक बाहर आ गए। कार्यभार ग्रहण करने की औपचारिकता पूरी कर दी गयी,पर सभी को बहुत आश्चर्य हुआ कि आखिर इतना ताम झाम क्यों ? कार्यवाही पूरी होने के बाद संकुल समन्वयक जी ने बताया कि नयी शिक्षिका जिला के एक वरीय प्रशासनिक अधिकारी की धर्मपत्नी हैं,जरा देखे रहियेगा और मिला-जुलाकर चलिएगा। राजेन्द्र बाबू के लिए,यह आख़िरी शब्द किसी वज्रपात से कम ना था,उन्हें जमीन डोलता नजर आया।
पूरा विद्यालय सदमे में था कि आखिर अब होगा क्या ?जब पहले दिन ही अनुशासन व्यवस्था से जुड़े व्यक्ति अनुशासन तोड़ने के समर्थन में हैं तो भविष्य में क्या होगा इसे लेकर सभी चिंतित थे।अगले दिन मैडम जी 9 बजे के बजाय 10 बजे स्कूल आयीं और आते ही 10 मिनट रूककर वापस चली गयीं।उसके बाद 3 दिन बाद आयीं और वही क्रम दोहरा दिया।
प्रधानाध्यापक जी ने इसकी शिकायत प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से करने की सोची। लेकिन, जब अधिकारी महोदय को अवगत कराया तो उन्होंने कह दिया कि थोडा एडजेस्ट कर लीजिए। सब जगह इतना टाइट व्यवस्था थोङे चलता है !!
कुल मिलाकर नयी मैडम के विद्यालय आने की सम्भावना ना के बराबर ही रहती थी। कुछ दिन बाद स्कूल के अन्य शिक्षक/शिक्षिकाएं भी उनकी तरह हीं सुविधा चाहने लगे।  नियमित और समय से आने वाले शिक्षक/शिक्षिका  अब देर से आने लगे इतना हीं नहीं सप्ताह में एक दो दिन की छुट्टी तो अब आम बात होने लगी। प्रधानाध्यापक नयी मैडम की नौकरी चलाने को मजबूर थे और स्टाफ उन पर ऐसा ना करने का दबाब बना रहा था। प्रधानाध्यापक जी ने मैडम जी कई बार नियमित आने का अनुरोध भी किया पर हर बार उन्होंने यही कहा कि आप मेरी चिंता ना करें।
लगभग 2 महीने में ही स्कूल की व्यवस्था पटरी से उतर गयी।स्कूल में नियमित पढ़ाई की जगह अब अध्यापक गप्पे करते नजर आते थे प्रतिदिन कोई ना कोई अध्यापक गैर हाजिर हो जाता और हैड साहब नयी मैडम के चक्कर में दबाब नहीं डाल पाते। आये दिन अभिभावक शिकायत के लिए आने लगे। हैड साहब कई बार अपनी समस्या लेकर बी आर सी गए पर सब उन मैडम के बारे में कुछ कहने से बचते दिखाई पड़े। एक बार जिला शिक्षा अधिकारी से भी मुलाकात की और मैडम के ना आने की शिकायत की पर वो भी एडजेस्टमेंट की सलाह देते नजर आये। यह सब देख-सुनकर राजेन्द्र बाबू काफी चिङचिङे हो गए । मृदुल-सौम्य स्वभाव वाले, अनुशासन प्रिय हैड मास्टर साहब अब बात-बात पर लोगों से झगङ जाते।
     एक दिन कुछ ग्रामीण शिकायत लेकर विद्यालय आए और हैड-साहब को काफी भला-बुरा कहने लगे,हैड साहब भी जमकर प्रति उत्तर दिया। गुस्साए अभिभावक गाँव वालों से हस्ताक्षर करवाकर एक शिकायती पत्र जिलाधिकारी महोदय को प्रेषित कर दिया।
स्कूल पर जांच बैठा दी गयी और प्रधानाध्यापक महोदय को लापरवाही और शैक्षणिक कार्यों में रूचि ना लेने के कारण निलंबित कर दिया गया और समस्त अध्यापकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया पर मैडम जी इस जांच से साफ़ बच गयीं।विद्यालय में अब आये दिन अधिकारियों के दौरे होंने लगे, मैडम जी को अगले आदेश तक आवश्यक कार्य हेतु पहले ही बी आर सी में प्रतिनियुक्त कर दिया गया । विद्यालय के बाक़ी शिक्षक भी अपने प्रभाव का प्रयोग कर स्थानांतरण करवा लिए और विद्यालय के 350 छात्र अब केवल एक निलंबित प्रधानाध्यापक के सहारे दिन काट रहे थे । जिला के एक श्रेष्ठ उत्क्रमित मध्य विद्यालय की गिनती अब सबसे ख़राब विद्यालय में थी और सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक इसके एक मात्र दोषी प्रधानाध्यापक श्री राजेंद्र सिंह जी थे।
मैडम जी को इस वर्ष का आदर्श शिक्षक पुरुस्कार मिला था और उनके सम्मान में होने वाले कार्यक्रम में राजेन्द्र जी अग्रिम पंक्ति में बैठे, ताली बजा रहे थे।
शायद हीं किसी को पता हो,कि यह ताली राजेन्द्र बाबू व्यवस्था की बदहाली पर बजा रहे थे या अपनी नाकामी पर।
शिक्षा व्यवस्था पर व्यगं

મદદ...

        અંધારુ થઈ રહ્યું હતું. તાળું મારેલા લોખંડના પ્રવેશદ્વારની બહારથી કોઈક બૂમ પાડી રહ્યું હતું. અત્યારે કોણ આવ્યું હશે એમ વિચારતા મેં પ્રવેશદ્વાર ઉઘાડ્યો. સામે એક વૃદ્ધ ઉભો હતો. તેના ચોળાયેલા કપડાં અને મોં પરના થાકથી જણાઈ આવતું હતું કે તે લાંબી મુસાફરી ખેડી અહીં સુધી પહોંચ્યો હતો.

"આ યોગાનંદ સ્ટ્રીટ નું ૮મું મકાન અને તમે જ આનંદ છો..?" તેણે પૂછ્યું. મેં કહ્યું, "હા, હું જ આનંદ છું. અને તમે...?" 
   
સહેજ ધ્રુજતા અને સૂકા હોઠ પર ભીની જીભ ફેરવતા મારા હાથમાં એક ચિઠ્ઠી મૂકતા તેમણે કહ્યું, "બાબુ, હું તારા પિતાનો મિત્ર છું. હું તારા ગામથી આવું છું. તારા પિતાએ મને આ ચિઠ્ઠી લખી📝 તને આપવા અને તારી મદદ લેવા કહ્યું છે."

તેમની આપેલી એ ચિઠ્ઠી ખોલી વાંચતા મેં નવાઈ પામતા પૂછ્યું, "મારા પિતાએ..? “

મેં ઝડપથી એ ચિઠ્ઠી વાંચી કાઢી. તેમાં લખ્યું હતું," દીકરા આનંદ, આશીર્વાદ. આ ચિઠ્ઠી તને આપનાર મારો મિત્ર છે. તેનું નામ રામૈયા છે અને તે ખૂબ મહેનતુ છે. થોડા દિવસો અગાઉ તેના એકના એક પુત્રનું માર્ગ અકસ્માતમાં મોત થયું છે. તેના વળતરનાં પૈસા માટે તેણે ઘણાં ધક્કા ખાધા છે. આ વળતર જ તેની નજીવી આવક સાથે મળી તેનું અને પત્નીનું ગુજરાન ચલાવવામાં સહાયરૂપ થશે. હું તેની સાથે પોલીસ રિપોર્ટસ, ટ્રાવેલ એજન્ટ દ્વારા અપાયેલા એફીડેવિટ્સ અને અન્ય જરૂરી દસ્તાવેજો મોકલી રહ્યો છું. તેને જણાવવામાં આવ્યું છે કે વળતરની ફાઇનલ ચૂકવણી મુખ્યકચેરીમાં થશે. આ તેની હૈદરાબાદની પ્રથમ મુલાકાત છે અને એ ત્યાં માટે અજાણ્યો છે. હું આશા રાખું છું કે તું એને મદદરૂપ થશે. તારી તબિયતનું ધ્યાન રાખજે. વહેલામાં વહેલી તકે અમને મળવા આવજે. તારા વ્હાલા પિતા. "
    
રામૈયાગુરુ ઉભો ઉભો મને એકીટશે આશાભરી નજરે જોઈ રહ્યો હતો. મેં એકાદ ક્ષણ માટે કઇંક વિચાર્યુ અને પછી હું તરત તેને ઘરમાં અંદર લઈ ગયો. તેને પાણી આપતા મેં પૃચ્છા કરી કે તેણે કંઈ ખાધું છે? તેણે જવાબ આપ્યો, "ના બેટા. મારી યાત્રા લંબાઈ જતાં, 🍎🍎બે ફળ સાથે લાવ્યો હતો તે ક્યારના પૂરા થઈ ગયા." અંદરથી હું તેના માટે ચાર ઢોસા અને થોડી ચટણી લઈ આવ્યો અને તેણે એ ધરાઈને ખાધા ત્યાં સુધીમાં મેં જરૂરી બે - ચાર ફોન કર્યાં.
    
મારા ફોન પતી ગયા બાદ મેં જોયું કે તે કેટલાક કાગળીયા તેના ખોળામાં લઈને બેઠો હતો. તેમાં તેના મૃત પુત્રનો ફોટો પણ હતો. એ જુવાન અને સોહામણો લાગતો હતો. વીસ - બાવીસ વર્ષનો  યુવાન. મારી આંખોના ખૂણાં ભીના થઈ ગયાં.
    
તેણે કહ્યું, "આ મારો એકનો એક પુત્ર હતો. તેના પહેલા અમને થયેલા સંતાનોને જુદા જુદા કારણોસર ઈશ્વરે પોતાની પાસે બોલાવી લીધા હતાં. મહેશ એક જ અમારી ઘડપણની મૂડી સમાન હતો. તે ખૂબ સારું ભણ્યો હતો અને તેણે સારી નોકરી પણ મેળવી હતી.અમને એવી આશા બંધાઈ હતી કે હવે તેની નોકરી શરૂ થયા બાદ અમારી મહેનતનું અમને ફળ મળશે અને અમારી મુશ્કેલીના દિવસો દૂર થશે. પણ એ ગોઝારા દિવસે તે પોતાની કોઈ ભૂલ વગર માર્ગ અકસ્માતનો ભોગ બન્યો અને અમને એકલા મૂકી દૂર દૂર ચાલ્યો ગયો. મૃત પુત્ર પાછળ વળતર લેવા શરૂઆતમાં અમને ખચકાટ થયો. પણ દિવસે દિવસે હું અશક્ત થતો જાઉં છું અને મારી પત્નીની તબિયત પણ સારી રહેતી નથી. તારા પિતાના સૂચન અનુસાર હું અહીં આવ્યો છું અને તેણે મને ખાતરી આપી છે કે તું આ કાર્ય પૂર્ણ કરવામાં મને મદદ કરશે."
     
"કંઈ વાંધો નહીં. હવે ઘણું મોડું થઈ ગયું છે. તમે નિરાંતે સૂઈ જાઓ." એમ કહી હું તેમના સૂવાની વ્યવસ્થા કરી પોતે પણ સૂઈ ગયો.🛌
   
બીજે દિવસે સવારે અમે તૈયાર થઈ ગયા.☕🥛 ચા-પાણી પી અમે વળતર મળવાનું હતું એ ઓફીસ પહોંચી ગયા. રમૈયાગુરુએ મને કહ્યું, "આનંદ, મને અહીં સુધી પહોંચાડયો એ બદલ તારો ખૂબ આભાર. હવે તું તારી ઓફિસે જા. આગળનું કામ હું જોઈ લઈશ."
   
મેં તેને કહ્યું, "મેં આજે રજા મૂકી દીધી છે. હું તમારી સાથે જ રહી તમારું કામ પતાવી આપીશ."
    
પછી આખો દિવસ થોડા ઘણાં ધક્કા ખાઈ અંતે અમે વળતર મેળવવામાં સફળ રહ્યા.
      
વૃદ્ધ રામૈયાગુરુએ મને અંતરથી આશિર્વાદ આપતા કહ્યું, "દીકરા તારા આ ઉપકારનો બદલો હું કઈ રીતે ચૂકવીશ..? હવે મારી માંદી પત્ની એકલી હોવાથી તેને મારી જરૂર છે અને હું તરત પાછો ગામ રવાના થઈ જાઉં."
    
"ચાલો હું તમને બસ સ્ટેન્ડ ઉતારી દઉં" કહી હું તેમની ટિકિટની વ્યવસ્થા કરી અને તેમને થોડા ફળો 🍎🍎🥭🥭🍇🍓🍐🍐🍌આપી વિદાય કરવા આવ્યો.
     
જતી વખતે એ વૃદ્ધની આંખોમાં જે ભીનાશ અને આભારવશતાની લાગણી હતી એ મારા હ્રદયને સ્પર્શી ગઈ. 🤩તેણે કહ્યું, "આનંદ બેટા, તે મારા માટે ઓફિસમાં એક દિવસની રજા લીધી અને મારું કામ પતાવી આપ્યું, હું તારા આ ઉદાર કૃત્યની વાત જતાવેંત તારા પિતાને કરીશ અને તેમનો પણ આભાર માનીશ."
     
મેં સ્મિત કરતા તેમના હાથ મારા હાથમાં લઈ કહ્યું, "હું તમારા મિત્રનો પુત્ર આનંદ નથી. હું અરવિંદ છું. તમે ખોટા સરનામે આવ્યા હતા. એ આનંદનું ઘર મારા ઘરથી બીજા બે કિલોમીટર આઘું છે. પણ મેં જોયું કે તમે ખૂબ થાકી ગયેલા હતા અને મારો જીવ તમને સત્ય કહેતા ન ચાલ્યો. મેં તમારા દસ્તાવેજોમાં આપેલા નંબર પર ફોન જોડ્યો હતો. આનંદની પત્નીએ મને જણાવ્યું કે એ કંઈક કામ માટે બહારગામ ગયો છે. મેં તમારા મિત્રને પણ ફોન જોડ્યો હતો. મેં તેમને હકીકત જણાવી તો તે ભારે ઉદાસ થઈ ગયા હતા. પણ જ્યારે મેં તેમને ખાતરી આપી કે તમારું કામ પૂરું કરવામાં હું મદદ કરીશ ત્યારે તેમને ખૂબ સારું લાગ્યું હતું.તમને જે ખોટ પડી છે એ તો કોઈ ભરપાઈ કરી શકવાનું નથી. પણ મને લાગ્યું મારે તમને મદદ તો કરવી જ જોઈએ. મેં એમ કર્યું અને મને એ દ્વારા અનહદ ખુશી મળી છે."🤩💫
  
મારી વાત સાંભળી રામૈયાની આંખોમાં ઝળઝળિયાં આવી ગયાં.🤣 તેણે મને મૂંગા મૂંગા જ આશિષ આપ્યાં અને બસ આવી જતાં વિદાય લીધી. મારા માટે તેમના ✋આશિર્વાદ ખૂબ કિંમતી હતાં. મારા પિતા તો પંદર વર્ષ અગાઉ જ પરમધામે સિધાવી ગયા હતા પણ રામૈયાગુરુ ને જોઈ મને કદાચ એવો પણ અહેસાસ થયો હતો કે મારા પિતા પાછા ફર્યા છે. ☁આકાશમાં જોતા મને એવી લાગણી થઈ કે એ ત્યાં ક્યાંક હશે. મેં કહ્યું, "પિતાજી, તમે મારા જીવનમાં હું કેટલો આગળ વધ્યો છું એ ચકાસવા આ સ્વરૂપે આવ્યા હતા ને? પત્ર લખીને તમે ચકાસી રહ્યા હતા ને કે તમારો દીકરો મદદ કરે છે કે નહીં. તમારા જેવા મહાન પિતાનો પુત્ર થઈ મેં મારી ફરજ બજાવી છે. તમે ખુશ છો ને..? “ મારી આંખોમાં પણ ઝળઝળિયા હતાં, હર્ષ નાં!🤣
   
મદદ કરવાની ભાવના રાખો, માર્ગો ઉભા થઈ રહેશે...✍

हाँ भगवान है..!!

एक मेजर के नेतृत्व में 15 जवानों की एक टुकड़ी हिमालय के अपने रास्ते पर थी
बेतहाशा ठण्ड में मेजर ने सोचा की अगर उन्हें यहाँ एक कप चाय मिल जाती तो आगे बढ़ने की ताकत आ जाती

लेकिन रात का समय था आपस कोई बस्ती भी नहीं थी
लगभग एक घंटे की चढ़ाई के पश्चात् उन्हें एक जर्जर चाय की दुकान दिखाई दी 
लेकिन अफ़सोस उस पर *ताला* लगा था.
भूख और थकान की तीव्रता के चलते जवानों के आग्रह पर मेजर साहब दुकान का ताला तुड़वाने को राज़ी हो गया खैर ताला तोडा गया, तो अंदर उन्हें चाय बनाने का सभी सामान मिल गया
जवानों ने चाय बनाई साथ वहां रखे बिस्किट आदि खाकर खुद को राहत दी  थकान से उबरने के पश्चात् सभी आगे बढ़ने की तैयारी करने लगे लेकिन मेजर साहब को यूँ चोरो की तरह दुकान का ताला तोड़ने के कारण आत्मग्लानि हो रही थी

उन्होंने अपने पर्स में से एक हज़ार का नोट निकाला और चीनी के डब्बे के नीचे दबाकर रख दिया तथा दुकान का शटर ठीक से बंद करवाकर आगे बढ़ गए. 

तीन महीने की समाप्ति पर इस टुकड़ी के सभी 15 जवान सकुशल अपने मेजर के नेतृत्व में उसी रास्ते से वापिस आ रहे थे

रास्ते में उसी चाय की दुकान को खुला देखकर वहां विश्राम करने के लिए रुक गए

उस दुकान का *मालिक* एक बूढ़ा चाय वाला था जो एक साथ इतने ग्राहक देखकर खुश हो गया और उनके लिए चाय बनाने लगा    

चाय की चुस्कियों और बिस्कुटों के बीच वो बूढ़े चाय वाले से उसके जीवन के  अनुभव पूछने लगे खास्तौर पर इतने बीहड़ में दूकान चलाने के बारे में    

बूढ़ा उन्हें कईं कहानियां सुनाता रहा और साथ ही भगवान का शुक्र अदा करता रहा 

तभी एक जवान बोला " *बाबा आप भगवान को इतना मानते हो अगर भगवान सच में होता तो फिर उसने तुम्हे इतने बुरे हाल में क्यों रखा हुआ है"* 

बाबा बोला *"नहीं साहब ऐसा नहीं कहते भगवान के बारे में,भगवान् तो है और सच में है .... मैंने देखा है"

आखरी वाक्य सुनकर सभी जवान कोतुहल से बूढ़े की ओर देखने लगे

बूढ़ा बोला "साहब मै बहुत मुसीबत में था एक दिन मेरे इकलौते बेटे को आतंकवादीयों ने पकड़ लिया उन्होंने उसे बहुत मारा पिटा लेकिन उसके पास कोई जानकारी नहीं थी इसलिए उन्होंने उसे मार पीट कर छोड़ दिया"

"मैं दुकान बंद करके उसे हॉस्पिटल ले गया मै बहुत तंगी में था साहब  और आतंकवादियों के डर से किसी ने उधार भी नहीं दिया"

"मेरे पास दवाइयों के पैसे भी नहीं थे और मुझे कोई उम्मीद नज़र नहीं आती थी उस रात साहब मै बहुत रोया और मैंने भगवान से प्रार्थना की और मदद मांगी "और साहब ...  उस रात भगवान मेरी दुकान में खुद आए"

"मै सुबह अपनी दुकान पर पहुंचा ताला टूटा देखकर मुझे लगा की मेरे पास जो कुछ भी थोड़ा बहुत था वो भी सब लुट गया"

" *मै दुकान में घुसा तो देखा  1000 रूपए का एक नोट, चीनी के डब्बे के नीचे भगवान ने मेरे लिए रखा हुआ है"*  

"साहब ..... उस दिन एक हज़ार के नोट की कीमत मेरे लिए क्या थी शायद मै बयान न कर पाऊं ... लेकिन भगवान् है साहब ... भगवान् तो है"*  बूढ़ा फिर अपने आप में बड़बड़ाया 

भगवान् के होने का आत्मविश्वास उसकी आँखों में साफ़ चमक रहा था

यह सुनकर वहां सन्नाटा छा गया

पंद्रह जोड़ी आंखे मेजर की तरफ देख रही थी जिसकी आंख में उन्हें अपने  लिए स्पष्ट आदेश था *"चुप  रहो "

मेजर साहब उठे, चाय का बिल अदा किया और बूढ़े चाय वाले को गले लगाते हुए बोले "हाँ बाबा मै जनता हूँ भगवान् है.... और तुम्हारी चाय भी शानदार थी"

और उस दिन उन पंद्रह जोड़ी आँखों ने पहली बार मेजर की आँखों में चमकते पानी के दुर्लभ दृश्य का साक्ष्य किया

और

सच्चाई यही है की भगवान तुम्हे कब किसी का भगवान बनाकर कहीं भेज दे ये खुद तुम भी नहीं जानते...........

कूपवाड़ा सेक्टर में घटित एक जवान द्वारा शेयर की गई सच्ची घटना (जम्मू एवं कश्मीर-भारत) ।
।। जय हिन्द ।।